परीक्षा से एक रात पहले गुड्डू ने तय किया कि वह पूरी रात पढ़ेगा। चाय बनाई, मेज़ साफ़ की और मोटी किताब खोलकर बैठ गया। पहला पन्ना पढ़ते ही उसे अचानक याद आया कि दराज़ बहुत गंदी है।
दराज़ साफ़ करने में एक घंटा लगा। उसमें पुरानी चिट्ठियाँ, स्कूल की तस्वीर और एक टूटा हुआ मोबाइल निकला। गुड्डू ने तस्वीर देखी, फिर चिट्ठियाँ पढ़ीं, फिर टूटा मोबाइल ठीक करने बैठ गया।
रात के दो बजे उसे ध्यान आया कि परीक्षा है। उसने किताब दोबारा खोली। पहला अध्याय, दूसरा अध्याय, तीसरा, और चौथे पर पहुँचते ही नींद आ गई।
सुबह माँ ने झकझोरकर जगाया। "आठ बज गए, परीक्षा नौ बजे है!"
गुड्डू उछलकर खड़ा हुआ, कपड़े पहने, दौड़कर बस पकड़ी और परीक्षा-केंद्र पहुँचा। पर्चा हाथ में आया तो उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। पहला सवाल: "अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल पर निबंध लिखिए।"
गुड्डू के चेहरे पर धीमी मुस्कान उभर आई। उसने क़लम उठाई और पूरे जोश से लिखना शुरू किया: "मेरी सबसे बड़ी भूल यह थी कि मैंने परीक्षा से पहले की रात दराज़ साफ़ की..."
उसने पूरे दो पन्ने भरे। चार किस्से, दो उदाहरण और अंत में एक सीख: "जो काम आज हो सकता है, उसे कल पर टालने से दराज़ तो साफ़ हो जाती है, पर दिमाग़ साफ़ नहीं होता।"
नतीजा आया तो गुड्डू को उस निबंध में पूरे अंक मिले। बाक़ी सवालों में उतने नहीं, पर शिक्षक ने टिप्पणी में लिखा था: "तुमने वही लिखा जो तुम जानते थे। अगली बार वह भी जानना जो पढ़ना था।"
गुड्डू ने वह पर्चा सँभालकर रख लिया। अब वह परीक्षा से पहली रात दराज़ नहीं छूता।
कथावर्स के लिए Claude (AI) द्वारा लिखी गई मौलिक कहानी, 2026