नदी के दोनों किनारों पर दो भाइयों के खेत थे। बीच में नदी बहती थी और कभी साथ में बँधा हुआ एक लकड़ी का पुल था, जो पिछली बाढ़ में टूट गया।
दोनों भाई बरसों से एक-दूसरे से नाराज़ थे। ज़मीन के बँटवारे पर हुई एक बहस ने उन्हें अलग कर दिया था। पुल टूटा तो दोनों ने सोचा, "मैं क्यों बनवाऊँ? वह बनवाए।"
सालों बीत गए। एक किनारे पर बड़े भाई का बेटा बीमार पड़ा, और दूसरे किनारे पर छोटे भाई की बहू के लिए दवा की ज़रूरत पड़ी। दोनों घरों को नदी पार जाना था, पर रास्ता बंद था।
उसी रात बड़े भाई ने कुल्हाड़ी उठाई और सुबह पौ फटते ही जंगल से लकड़ियाँ काटीं। छोटे भाई ने भी उसी समय अपनी रस्सियाँ बाँधकर तैयार कीं।
दोनों नदी के किनारे आमने-सामने खड़े हुए। बीच में चौड़ा पानी बह रहा था। कुछ देर तक कोई कुछ नहीं बोला।
फिर बड़े भाई ने लकड़ी का पहला तख़्ता पानी की ओर बढ़ाया। छोटे भाई ने अपनी ओर से रस्सी फेंक दी। दोनों ने मिलकर तख़्ते जोड़े, कील ठोकी और शाम तक पुल फिर से खड़ा कर दिया।
बीच पुल पर दोनों मिले। कोई कुछ नहीं बोला। बड़े भाई ने बस छोटे भाई का हाथ पकड़ा।
"चलो, भतीजे की दवा पहले ले आते हैं," छोटे ने कहा।
"और बहू की भी।"
उस दिन के बाद पुल पर रोज़ किसी न किसी का आना-जाना रहता। और दोनों भाई शाम को उसी पुल पर बैठकर पुरानी बातें याद करते, बिना किसी बहस के।
कथावर्स के लिए Claude (AI) द्वारा लिखी गई मौलिक कहानी, 2026