बरसात आने से पहले चींटियों की रानी ने सभा बुलाई। "सर्दियों के लिए अनाज जमा करना है। हर चींटी काम बाँट ले।"
सबने सिर हिलाया। कोई अनाज ढोने को तैयार हुई, कोई बिल को मज़बूत करने को। पर एक नन्ही चींटी, चिंकी, चुपचाप खड़ी रही।
"चिंकी, तुम क्या करोगी?" रानी ने पूछा।
"मैं बहुत छोटी हूँ, महारानी। मुझसे कुछ भारी नहीं उठेगा।"
सब हँस पड़े। चिंकी की आँखें भर आईं। रानी ने कहा, "रुको। हर काम बड़ा नहीं होता। चिंकी, तुम रास्ते की पहरेदार बनो। जहाँ ख़तरा दिखे, सबको बताओ।"
चिंकी को काम मिला तो वह जोश में आ गई। वह रास्ते के किनारे एक पत्ते पर चढ़कर खड़ी हो जाती और चारों तरफ़ देखती रहती।
एक दोपहर उसे दूर से भारी क़दमों की आवाज़ सुनाई दी। एक बड़ा-सा जूता उनके रास्ते की ओर आ रहा था। चिंकी ज़ोर से चिल्लाई, "रुक जाओ! सब किनारे हो जाओ!"
आवाज़ बहुत पतली थी, पर पीछे की चींटियों ने उसे सुना और संदेश आगे फैलता गया। देखते-देखते क़तार किनारे हट गई। जूता सीधे उसी जगह पड़ा जहाँ एक पल पहले अनाज का ढेर था।
सबने राहत की साँस ली। रानी ने चिंकी को पास बुलाया। "आज तुमने पूरी बस्ती को बचाया।"
"मैं तो बस देख रही थी, महारानी।"
"कभी-कभी सबसे ज़रूरी काम बस ध्यान से देखना होता है।"
उस दिन से चिंकी सबकी प्यारी पहरेदार बन गई। और किसी चींटी ने फिर कभी किसी को छोटा नहीं कहा।
कथावर्स के लिए Claude (AI) द्वारा लिखी गई मौलिक कहानी, 2026