सात साल की परी को साइकिल चलाना सीखना था। उसके भैया ने साइकिल का पिछला पहिया पकड़ा और बोले, "मैं पकड़े हूँ, तू बस पैडल मार।"
परी ने पैडल मारे। साइकिल डगमगाई, पर चल पड़ी। वह खिलखिलाकर चिल्लाई, "भैया, मैं चला रही हूँ!"
भैया ने कुछ नहीं कहा, बस साथ दौड़ते रहे। गली का मोड़ आया तो परी ने घबराकर कहा, "भैया, पकड़े रहना।"
"हाँ, पकड़े हूँ।"
मोड़ के बाद परी सीधी सड़क पर आई। वह आत्मविश्वास से हँसने लगी। उसे लगा कि वह अब बिलकुल ठीक चला रही है। तभी उसने पीछे मुड़कर देखा। भैया तो बहुत पीछे खड़े थे, दोनों हाथ हवा में लिए मुस्कुरा रहे थे।
"भैया! आपने तो छोड़ दिया था!"
साइकिल डगमगाई और परी गिर पड़ी। घुटने पर हल्की खरोंच आई। वह रोने लगी। भैया दौड़कर आए।
"चोट लगी?"
"आपने छोड़ क्यों दिया था?"
"क्योंकि तू तो पहले ही चलना सीख चुकी थी, बस तुझे पता नहीं था।"
परी ने आँसू पोंछे और घुटना देखा। फिर साइकिल की ओर देखा। "तो मैं ख़ुद चला रही थी?"
"कब से। पर जब तक तू मुड़कर देखती नहीं, तुझे यक़ीन ही नहीं आता।"
परी कुछ पल सोचती रही। फिर बोली, "भैया, अब आप मुझे मत देखो। मैं ख़ुद चलाकर दिखाऊँगी।"
वह साइकिल पर बैठी, पैडल मारा और आगे निकल गई। इस बार उसने पीछे नहीं देखा। भैया पीछे खड़े मुस्कुराते रहे।
कथावर्स के लिए Claude (AI) द्वारा लिखी गई मौलिक कहानी, 2026