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बाल-कथा
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मिट्टी का घोड़ा

टेढ़ी टाँग वाला घोड़ा और उसकी सही दोस्त।

२ मिनट में पढ़ें · २५४ शब्द

कुम्हार रामू के आँगन में मिट्टी के बहुत से खिलौने रखे थे: हाथी, तोते, गुड़िया और एक छोटा-सा घोड़ा। घोड़ा बाक़ियों से अलग था, क्योंकि उसकी एक टाँग ज़रा टेढ़ी बन गई थी।

सब खिलौने बाज़ार में बिके, पर घोड़ा रह गया। कोई उसे नहीं ख़रीदता था। ग्राहक कहते, "इसकी टाँग तो टेढ़ी है।"

घोड़ा उदास हो गया। उसने तोते से कहा, "काश मेरी टाँग भी सीधी होती।"

तोते ने कहा, "तुम बहुत सुंदर हो।" पर तोता तो बिक चुका था और कहीं दूर चला गया।

एक दिन एक छोटी बच्ची अपनी माँ के साथ आँगन में आई। उसके पैर में पोलियो की वजह से जूता कुछ टेढ़ा था और वह थोड़ा लँगड़ाकर चल रही थी। उसने घोड़े को उठाया और ख़ुशी से बोली, "माँ, देखो! यह भी मेरी तरह चलता है!"

माँ की आँखों में नमी आ गई। "कितने का है?" उन्होंने रामू से पूछा।

रामू ने मुस्कुराकर कहा, "यह तो बिना दाम का है। इसकी टाँग टेढ़ी थी, इसलिए यह बाज़ार तक नहीं पहुँचा। शायद इसे आप ही के पास पहुँचना था।"

बच्ची घोड़े को सीने से लगाए घर लौटी। उसने उसे अपने सिरहाने रखा। रात को उसने घोड़े से कहा, "कल हम साथ स्कूल चलेंगे।"

अगले दिन बच्ची बस्ते में घोड़ा रखकर स्कूल गई। जब बच्चे उसकी चाल पर हँसे, तो उसने घोड़ा निकालकर दिखाया। "यह मेरा दोस्त है। यह भी मेरी तरह अलग है, और हम दोनों को अपनी चाल पर गर्व है।"

कक्षा में सन्नाटा छा गया। फिर एक बच्चे ने कहा, "मुझे भी एक मिट्टी का घोड़ा चाहिए।"

कथावर्स के लिए Claude (AI) द्वारा लिखी गई मौलिक कहानी, 2026