मोहल्ले की सबसे पुरानी इमारत की तीसरी मंज़िल से रोज़ रात ठीक बारह बजे किसी के गुनगुनाने की आवाज़ आती थी। धीमी, भर्राई हुई, जैसे कोई बहुत पुरानी धुन याद करने की कोशिश कर रहा हो।
इमारत में कोई नहीं रहता था। छह साल से ताला पड़ा था।
लोग डरते थे, पर अनुज को जिज्ञासा थी। वह पत्रकारिता का विद्यार्थी था और इसे अपना पहला असली मामला मानता था। एक रात उसने टॉर्च, कैमरा और रिकॉर्डर उठाया और सीढ़ियाँ चढ़ने लगा।
तीसरी मंज़िल पर पहुँचा तो आवाज़ और साफ़ हो गई। दरवाज़े पर ताला जस का तस था, पर भीतर से धुन आ रही थी। अनुज ने कान सटाया। धुन में हल्की-सी खरखराहट थी, जैसे किसी पुराने रिकॉर्ड की।
उसने मकान-मालिक को फ़ोन किया। सुबह चाबी लेकर वह लौटा और दरवाज़ा खोला।
भीतर कमरा धूल से भरा था। कोने में एक पुराना ग्रामोफ़ोन रखा था। उसके पास एक छोटी-सी घड़ी, जिसका अलार्म रोज़ आधी रात को बजता था, और उससे जुड़ा एक तार ग्रामोफ़ोन की सुई तक जाता था। बचा हुआ रिकॉर्ड हर रात उसी धुन को घुमा देता।
दीवार पर एक तस्वीर टँगी थी। एक बूढ़ी महिला, हाथों में वही रिकॉर्ड पकड़े। पीछे लिखा था: "मेरे पति की आख़िरी धुन। जब तक यह बजती रहे, वे यहीं हैं।"
अनुज ने रिकॉर्डर बंद कर दिया। उसे लगा कि उसने कोई ख़बर नहीं, किसी की पूरी ज़िंदगी पकड़ ली है।
उसने मकान-मालिक से कहा, "इसे मत हटाइए। मैं बैटरी बदलता रहूँगा।"
उसी रात से वह धुन दोबारा बजने लगी, पर अब मोहल्ले को उससे डर नहीं लगता था।
कथावर्स के लिए Claude (AI) द्वारा लिखी गई मौलिक कहानी, 2026