अम्मा की अलमारी में एक पुरानी हरी साड़ी थी, जिसे वह सिर्फ़ त्योहारों पर पहनती थीं। किनारे की ज़री उधड़ चुकी थी और रंग हल्का पड़ गया था, पर अम्मा उसे हर बार सँभालकर तह करतीं।
सुरभि को वह साड़ी कभी पसंद नहीं आई। "अम्मा, आप नई क्यों नहीं ले लेतीं? यह तो बहुत पुरानी हो गई है।"
अम्मा बस मुस्कुरा देतीं। "यह तेरे नाना ने दी थी।"
जब सुरभि की शादी तय हुई तो उसने ख़ुद अम्मा के लिए एक चमकदार लाल साड़ी ख़रीदी। अम्मा ने उसे हाथ में लिया, सहलाया और बहुत देर तक कुछ नहीं बोलीं।
शादी की सुबह अम्मा वही हरी साड़ी पहनकर आईं। सुरभि ने चिढ़कर कहा, "अम्मा! वह नई वाली कहाँ गई?"
अम्मा ने सुरभि का चेहरा अपने हाथों में लिया। "बेटी, नई साड़ी बहुत सुंदर है, उसे मैं तेरी विदाई के बाद पहनूँगी। पर आज के दिन मुझे अपने पिता की याद चाहिए। जब वे इस दुनिया में थे, तब से अब तक मेरे हर बड़े दिन में यही साड़ी साथ रही है।"
सुरभि की आँखें भर आईं। उसने पहली बार साड़ी के किनारे को ध्यान से देखा। वहाँ महीन धागे से कढ़ाई की गई एक छोटी चिड़िया थी, जो उसने पहले कभी नहीं देखी थी।
"यह किसने बनाई?"
"मैंने। जिस दिन तेरे नाना ने साड़ी दी, उसी रात।"
विदाई के समय सुरभि ने अम्मा को गले लगाया और कहा, "अम्मा, जब मैं माँ बनूँगी, तो आप यह साड़ी मुझे दे देना।"
अम्मा ने साड़ी की तह पर हाथ फेरा। "तब तक इसे और सँभालकर रखूँगी।"
कथावर्स के लिए Claude (AI) द्वारा लिखी गई मौलिक कहानी, 2026