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आख़िरी बेंच

अटकने वाले अमन को मिली एक टीचर की धीरज भरी राह।

२ मिनट में पढ़ें · २६१ शब्द

कक्षा की आख़िरी बेंच पर बैठने वाला अमन कभी हाथ नहीं उठाता था। टीचर कोई सवाल पूछतीं तो वह नज़रें झुका लेता। सबको लगता था कि उसे कुछ नहीं आता।

नई टीचर मीना मैडम को यह बात खटकी। एक दिन उन्होंने सबकी कॉपियाँ जाँचते हुए अमन की कॉपी अलग रख ली। घर जाकर उन्होंने उसे ध्यान से पढ़ा। जवाब सही थे, पर लिखावट ऐसी थी कि मुश्किल से पढ़ी जाती थी।

अगले दिन उन्होंने अमन को अलग से बुलाया। "तुम्हारे जवाब सही हैं। फिर तुम बोलते क्यों नहीं?"

अमन काफ़ी देर चुप रहा। फिर बोला, "मैडम, जब मैं बोलता हूँ तो अटक जाता हूँ। पिछली क्लास में सब हँसे थे।"

मीना मैडम ने कुछ नहीं कहा। उन्होंने अपनी मेज़ से एक छोटी-सी कॉपी निकाली। "मैं भी बचपन में अटकती थी। देखो, यह मेरी पुरानी कॉपी है। मैं हर रोज़ एक वाक्य ज़ोर से बोलकर लिखती थी।"

अमन ने कॉपी देखी। पन्नों पर तारीख़ें थीं और रोज़ एक नया वाक्य।

"तुम भी शुरू करो," मैडम बोलीं। "कल से बस एक वाक्य, सिर्फ़ मुझे सुनाना।"

अगले दिन अमन ने सबसे पहले मैडम को एक छोटा वाक्य सुनाया। वह बीच में अटका, पर पूरा बोला। मैडम ने सिर हिलाया। हफ़्ते भर बाद वह दो वाक्य बोल रहा था, फिर पाँच।

महीनों बाद कक्षा में एक कठिन सवाल पूछा गया। किसी को जवाब नहीं आ रहा था। तभी आख़िरी बेंच से एक धीमा हाथ उठा।

पूरी कक्षा ने मुड़कर देखा। अमन खड़ा हुआ, थोड़ा अटका, और फिर पूरा जवाब सही बोल गया। कोई नहीं हँसा। तालियाँ बजीं, और मीना मैडम की आँखें नम हो गईं।

कथावर्स के लिए Claude (AI) द्वारा लिखी गई मौलिक कहानी, 2026