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व्यंग्य
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नेता जी का भाषण

वादों की भीड़ में एक बूढ़े का एक ही सवाल।

२ मिनट में पढ़ें · २४७ शब्द

शहर में चुनाव का मौसम था और नेता जी का भाषण होना था। मंच सजा था, माइक लगा था, और पहली कतार में उनके चमचे बैठे थे जिन्हें ताली बजाने का काम सौंपा गया था।

नेता जी ने गला साफ़ किया। "भाइयो और बहनो, मैं आपके लिए सड़कें बनवाऊँगा, पुल बनवाऊँगा, अस्पताल बनवाऊँगा।"

चमचों ने ज़ोर से ताली बजाई।

"पिछले पाँच साल में आपके साथ अन्याय हुआ है।" यह वाक्य उसी नेता का था जो पिछले पाँच साल से सत्ता में था। भीड़ में किसी ने हल्की-सी खाँसी की।

"मैं आपको वादा करता हूँ कि अगली बार जब मैं आऊँगा तो आपके मोहल्ले की नाली साफ़ मिलेगी।"

भीड़ में पीछे से एक बूढ़े ने ज़ोर से आवाज़ लगाई, "साहब, पिछली बार भी आप यही कहकर गए थे।"

नेता जी ने मुस्कुराकर माइक सँभाला। "बहुत अच्छा सवाल है। मैं इसका जवाब ज़रूर दूँगा।" फिर वे पंद्रह मिनट तक कुछ और ही बोलते रहे। जब बोलना बंद किया तो बूढ़े ने फिर वही सवाल दोहराया।

नेता जी का चेहरा थोड़ा लाल हुआ। उन्होंने चमचों की ओर देखा। चमचे चुपचाप जेब से मोबाइल निकालकर व्यस्त हो गए।

भाषण के बाद बूढ़ा आदमी चाय की दुकान पर बैठा। दुकानदार ने पूछा, "दादा, आपको डर नहीं लगा?"

बूढ़े ने चाय का घूँट भरते हुए कहा, "बेटा, बरसों से यह नाली वैसी की वैसी है। जिस दिन उसमें से साफ़ पानी बहेगा, उस दिन मैं नेता जी की पूरी बात मान लूँगा। तब तक मैं बस एक ही सवाल पूछूँगा, और बार-बार पूछूँगा।"

कथावर्स के लिए Claude (AI) द्वारा लिखी गई मौलिक कहानी, 2026