आठ साल की पीहू के पास एक छोटा-सा गुड़िया-घर था, जो उसके पापा ने गत्ते और माचिस की डिब्बियों से बनाया था। उसमें न बिजली थी, न असली खिड़कियाँ, पर पीहू के लिए वह दुनिया का सबसे सुंदर महल था।
एक दिन पड़ोस की सहेली नेहा आई। उसके पास प्लास्टिक का बड़ा, चमकदार गुड़िया-घर था, जिसमें सच में बत्तियाँ जलती थीं। नेहा ने पीहू का घर देखा और हँसकर बोली, "यह तो कितना पुराना और टेढ़ा है।"
पीहू चुप हो गई। शाम को उसने पापा से कहा, "पापा, मेरा घर टेढ़ा है।"
पापा ने घर उठाकर देखा। "हाँ, थोड़ा टेढ़ा तो है। यह दाईं दीवार मैंने जल्दी में लगा दी थी।"
पीहू को लगा कि पापा उसे बहलाएँगे, पर पापा ने सच कहा था। वह चौंककर उन्हें देखने लगी।
"पर बेटा," पापा बोले, "इस टेढ़ी दीवार के पीछे तेरी छोटी गुड़िया रोज़ सोती है, क्योंकि वहाँ उसे हवा नहीं लगती। और जो माचिस की डिब्बी तूने दरवाज़ा बनाई थी, वह खुलती भी तो तेरे हाथ से ही है।"
पीहू ने घर को फिर देखा। सच में हर टेढ़ी चीज़ की अपनी एक कहानी थी, और हर कहानी में वह खुद थी।
अगले दिन नेहा फिर आई। इस बार पीहू ने कहा, "मेरा घर टेढ़ा ज़रूर है, पर इसकी हर चीज़ मैंने खुद चुनी है। चलो, आज मेरे घर में खेलते हैं।"
नेहा झिझकी, फिर बैठ गई। थोड़ी देर में वह माचिस के दरवाज़े से गुड़िया को अंदर-बाहर कर रही थी और उसकी बत्तियों वाला घर कोने में अकेला जल रहा था।
शाम को नेहा ने जाते हुए धीरे से कहा, "तेरे घर में खेलना ज़्यादा अच्छा लगा।"
पीहू मुस्कुराई, और उसने टेढ़ी दीवार को प्यार से थपथपा दिया।
कथावर्स के लिए Claude (AI) द्वारा लिखी गई मौलिक कहानी, 2026