गाँव के चौक में एक पुराना बरगद खड़ा था। उसकी जटाएँ इतनी लंबी थीं कि बच्चे उन पर झूलते और बूढ़े उसकी छाँव में बैठकर अपने ज़माने की बातें करते। पंचायत भी उसी की जड़ों के पास बैठती थी।
एक साल गाँव में सड़क बननी थी। इंजीनियर साहब नक़्शा लेकर आए और बोले, "सड़क सीधी निकलेगी, बरगद को कटवाना पड़ेगा।"
सरपंच रामदीन चुप रह गए। पीछे से किसी ने कहा, "सड़क आएगी तो बाज़ार आएगा, बस आएगी, हमारे बच्चों को शहर का रास्ता मिलेगा।" किसी और ने कहा, "पर यह पेड़ तो हमारे दादाओं ने देखा है।"
रात को रामदीन अकेले बरगद के नीचे बैठे रहे। हवा चली तो पत्तों की सरसराहट उन्हें किसी पुराने गीत जैसी लगी। उन्हें याद आया कि इसी पेड़ के नीचे उनकी शादी की बारात रुकी थी, इसी के नीचे पहली बार गाँव ने पोलियो की बूँदें पी थीं, और इसी के नीचे उनके पिता ने उन्हें सिखाया था कि फ़ैसला वही सही है जो सबको सुनकर लिया जाए।
सुबह उन्होंने पूरे गाँव को बुलाया। "न सड़क का विरोध करूँगा, न पेड़ का। पर इंजीनियर साहब से पूछते हैं कि क्या नक़्शा थोड़ा मोड़ा जा सकता है।"
इंजीनियर पहले हँसे, फिर नक़्शा देखने लगे। दो घंटे की माथापच्ची के बाद रास्ता निकला। सड़क बरगद के बगल से गोल घूमकर गुज़रेगी, बस सौ मीटर लंबी हो जाएगी।
"सौ मीटर ही तो है," इंजीनियर साहब ने कंधे उचकाए। "वैसे मुझे भी ऐसी छाँव कहीं नहीं मिली।"
आज उस सड़क पर बस गुज़रती है। चालक मोड़ पर रुककर कुछ देर हॉर्न नहीं बजाता, क्योंकि गाँव वालों ने सबको यह सिखा दिया है कि बरगद के नीचे बैठे बूढ़ों की बातचीत में खलल नहीं डालते।
रामदीन अब भी वहीं बैठते हैं। जब कोई नया बच्चा पूछता है कि सड़क यहाँ से घूमकर क्यों जाती है, तो वे मुस्कुराकर कहते हैं, "क्योंकि जो चीज़ हमें छाँव देती है, उसके लिए थोड़ा चक्कर लगाना कोई महँगा सौदा नहीं।"
कथावर्स के लिए Claude (AI) द्वारा लिखी गई मौलिक कहानी, 2026